काशी में गंगा तट पर बटुकों ने कुछ इस तरह किया नव संवत्सर 2076 का स्वागत

अपने मनोरम नज़ारे के लिए बनारस की सुबह पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन आज का दिन कुछ ख़ास है भारतीय संस्कृति एवं शास्त्रों द्वारा प्रतिपातित इस भारतीय नव संवत्सर के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक स्वरुप से लोगों का परिचय कराने के लिए ये लोग एकत्र हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ आज के ही दिन ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की थी और सूर्य की सबसे पहली किरण काशी पहुची। प्रसिद्ध शंकराचार्य घाट पर श्री विद्यामठ के बटुकों ने योग के आसनों का प्रदर्शन किया।

इस कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार, अर्घ्य व दीपदान कर नवसंवत्सर का अभिनंदन किया गया। इस मौके पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नूतन सनातनी का विमोचन किया और फिर विभिन्न लोगों को अंग वस्त्रम भेंट कर हिंदू नव वर्ष की शुभाकामना भी दी। बता दें कि हिन्दू पंचाग के मुताबिक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है। इस रोज हर साल वाराणसी में परंपरागत रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

वर्ष का आज प्रथम दिन है। वासंतिक नवरात्र एवं हिन्दू नववर्ष के शुभारंभ के मौके पर काशी ने नव संवत्सर का एक अनोखे अंदाज में स्वागत किया गया। काशी के गंगा तट पर नव संवत्सर 2076 के स्वागत के दौरान शनिवार को एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। सूर्य के उदय के साथ ही संपूर्ण काशी ने भव्य रूप में नव संवत्सर की अर्घ्य-दीपदान और सूर्य नमस्कार के साथ अनोखा स्वागत किया।

प्राचीन केदार घाट पर वेद पाठ करने वाले बटुकों  ने विश्व शान्ति के लिए माँ गंगा से प्रार्थना की .भारतीय नववर्ष की शुरआत योग से शुरू कर स्वस्थ्य रहने का सन्देश दिया । वहीं इस अलौकिक दृश्य को कैमरे में कैद करने को देशी-विदेशी सैलानियों के बीच काफी उत्साह देखने को

अपने मनोरम नज़ारे के लिए बनारस की सुबह पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन आज का दिन कुछ ख़ास है भारतीय संस्कृति एवं शास्त्रों द्वारा प्रतिपातित इस भारतीय नव संवत्सर के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक स्वरुप से लोगों का परिचय कराने के लिए ये लोग एकत्र हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़ आज के ही दिन ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की थी और सूर्य की सबसे पहली किरण काशी पहुची। प्रसिद्ध शंकराचार्य घाट पर श्री विद्यामठ के बटुकों ने योग के आसनों का प्रदर्शन किया।

इस कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार, अर्घ्य व दीपदान कर नवसंवत्सर का अभिनंदन किया गया। इस मौके पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नूतन सनातनी पंचांग का विमोचन किया और फिर विभिन्न लोगों को अंग वस्त्रम भेंट कर हिंदू नव वर्ष की शुभाकामना भी दी। बता दें कि हिन्दू पंचाग के मुताबिक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन हिन्दू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है। इस रोज हर साल वाराणसी में परंपरागत रूप से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

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