निशुल्क काउंसलिंग : मोबाइल फोन के नशे से छुटकारे के लिए मंडलीय अस्पताल के ‘मन-कक्ष’ में इसकी व्यवस्था की जा रही है

छोटे बच्चों और किशोरों में लगातार बढ़ रहे मोबाइल फोन के नशे पर नियंत्रण के लिए अब सरकार भी गंभीर है।

छोटे बच्चों और किशोरों में लगातार बढ़ रहे मोबाइल फोन के नशे पर नियंत्रण के लिए अब सरकार भी गंभीर है। इसके लिए मंडलीय अस्पताल में व्यवस्था की जा रही है। काउंसिलिंग के जरिये मोबाइल फोन की लत से छुटकारे का प्रयास किया जाएगा। बच्चों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति को भी खत्म करने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके बताए जाएंगे।

वाराणसी के कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल के ‘मन-कक्ष’ में इसकी व्यवस्था की जा रही है। यहां 10 काउंसलर बच्चों और अभिभावकों की मदद करेंगे। यह परामर्श पूरी तरह नि:शुल्क होगा। इस सम्बन्ध में स्वास्थ्य निदेशक मधु सक्सेना ने पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मोबाइल के अधिक प्रयोग से युवा, वयस्क सहित हर वर्ग के लोगों में आंखें शुष्क होने, बच्चों के आक्रामक हो जाने, परीक्षाओं में कम अंक पाने या अनुत्तीर्ण होने पर आत्महत्या करने जैसी समस्या बढ़ी है। कई तरह के मोबाइल गेम्स बच्चों में यह प्रवृत्ति बढ़ा रहे हैं। इन्हें काउंसलिंग एवं आवश्यकतानुसार औषधियां देकर बचाना जरूरी है।

सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशक के पत्र के आधार पर मोबाइल नशा मुक्ति के लिए परामर्श दिया जाएगा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. पीपी गुप्ता हैं। मंडलीय अस्पताल में मानसिक बीमारीयों के लिये ‘मन-कक्ष’ पहले से स्थापित है। उन्होंने बताया कि मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से सिर दर्द, थकान, बेचैनी, शारीरिक कमजोरी और नींद में अनियमितता हो रही है, जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। अभी तक मन कक्ष में मानसिक स्वास्थ्य, गैर संचारी रोगों जैसे-मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तंबाकू नियंत्रण, किशोरा-किशोरी स्वास्थ्य, एचआईवी-एड्स, परिवार नियोजन एवं कल्याण के लिए परामर्श दिया जा रहा है।

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